सामान्य विज्ञान
ओजोन मण्डल पराबैगनी किरणों को अवशोषित करके पृथ्वी के जीवों की रक्षा करता है।
. आर्गन गैस विद्युत बल्बों में भरी जाती है क्योंकि इसकी उपस्थिति में तन्तु (Filament) बहुत समय तक सुरक्षित रहता है।
रेडॉन का प्रयोग कैंसर उपचार में किया जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड के तनु विलयन का प्रयोग कीटाणुनाशक के रूप में दाँत, कान, घाव आदि धोने में किया जाता है। पुराने तैल चित्रों को चमकदार बनाने के लिये हाइड्रोजन परॉक्साइड का प्रयोग किया जाता है।
. सोडियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग सूती कपड़ों में चमक पैदा करने
. सोडियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग सूती कपड़ों में चमक पैदा करने
(Marcerisation) में किया जाता है।
. -273°C तापमान का केल्विन में मान 0°K होता है। - 0°K तापमान को परम शून्य (Absolute zero) कहते हैं।
• सोडियम बाइकार्बोनेट (Na2HCO3) का प्रयोग बेकिंग पाउडर, झागदार पेय तथा
अनेक दवाइयों में किया जाता है।
पोटेशियम क्लोरेट (KCIO3) का प्रयोग आतिशबाजी तथा कीड़े मारने की दवाई के रूप में किया जाता है।
पोटेशियम साइनाइड (KCN) एक विष है, इसका प्रयोग सोने व चाँदी के विद्युत
पोटेशियम क्लोरेट (KCIO3) का प्रयोग आतिशबाजी तथा कीड़े मारने की दवाई के रूप में किया जाता है।
पोटेशियम साइनाइड (KCN) एक विष है, इसका प्रयोग सोने व चाँदी के विद्युत
लेपन में किया जाता है।
• कॉपर सल्फेट एक जहर है। इसे कीटाणुनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
• सिल्वर नाइट्रेट (Agno3) का प्रयोग निशान लगाने वाली स्याही बनाने में किया
जाता है। वोटरों की अंगुली पर इसी का निशान लगाया जाता है।
जाता है। वोटरों की अंगुली पर इसी का निशान लगाया जाता है।
बुझा हुआ चूना [Ca(OH)2] दीवारों पर सफेदी करने के काम आता है।
• कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) का प्रयोग दंत मंजन, पाउडर तथा पेस्ट बनाने में किया जाता है।
• जिंक ऑक्साइड • जिंक ऑक्साइड (ZnO), जिंक व्हाइट अथवा चाइनीज व्हाइट के नाम से सफद
पेन्टों में प्रयोग किया जाता है।
• मरहम और चेहरे की क्रीम बनाने में भी जिक ऑक्साइड (ZnO) का प्रयोग
किया जाता है।
• जिंक सल्फाइड स्फुरदीप्त पर्दे (Phosphorescent) बनाने में काम आता है।
• मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCI2 ) का 1% विलयन शल्यकर्म औजारों के
• जिंक सल्फाइड स्फुरदीप्त पर्दे (Phosphorescent) बनाने में काम आता है।
• मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCI2 ) का 1% विलयन शल्यकर्म औजारों के
निजकरण (Sterilisation) में प्रयोग किया जाता है।
• पारे का उपयोग मरकरी वाष्प लैम्प बनाने में होता है।
• एल्युमीनियम का प्रयोग सिगरेट, साबुन, मिठाई लपेटने के लिये पतली परतों के
रूप में होता है।
• हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्त्व है।
• ट्राइटियम हाइड्रोजन का रेडियोएक्टिव समस्थानिक है।
• जल हाइड्रोजन का उदासीन ऑक्साइड है। • शुद्ध जल का क्वथनांक 100°C तथा हिमांक 0°C होता है।
• शुद्ध जल एक ध्रुवीय यौगिक है। (द्विध्रुव आघूर्ण = 1.85D) तथा इसका
डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक उच्च होता है।
• जियोलाइट जल के शुद्धिकरण में प्रयोग होता है।
• भारी जल भारी हाइड्रोजन का ऑक्साइड होता है।
• भारी जल का क्वथनांक 101.42°C तथा हिमांक 3,8°C होता है।
• भारी जल नाभिकीय रिएक्टर में मन्दक के रूप में प्रयोग किया जाता है। |
• हाइड्रोजन परॉक्साइड रेशम, ऊन, पंख आदि कोमल वस्तुओं का विरंजन करने
में प्रयुक्त होता है।
पेट्रोल की गाड़ी चन्द्रमा पर नहीं चल सकती क्योंकि वहाँ पर वायुमण्डल नहीं है।
• नाइट्रस ऑक्साइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड पर्यावरण में अम्ल वर्षा का प्रमुख
कारण है।
सोने के आभूषण बनाते समय सोने में ताँबा मिलाया जाता है।
* पानी की स्थाई कठोरता का कारण कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के घुलित
क्लोराइड तथा सल्फेट लवण होते हैं।
• पानी की अस्थाई कठोरता कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों के कारण
होती है।
• पानी की अस्थाई कठोरता को उबालकर दूर किया जा सकता है।
• नींबू में साइट्रिक अम्ल पाया जाता है।
• इमली में टारटरिक अम्ल होता है ।
• साधारण काँच में सोडियम, पोटेशियम, कैल्सियम और लैड के सिलिकेट होते
• यदि साधारण काँच को बनाते समय उसमें सिल्वर क्लोराइड डाल दिया जाये तो
वह काँच फोटोक्रोमिक किस्म का अथवा स्वत: रंग बदलने वाला बन जाता है।
• घरों में ईंधन के रूप में प्रयुक्त की जाने वाली द्रवित प्राकृतिक गैस को एल० पी०
जी कहते हैं। यह ब्यूटेन तथा प्रोपेन गैसों का मिश्रण होती है।
• किसी विद्युत अपघटनी सैल के एनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण और कैथोड पर
अवकरण की क्रिया होती है।
सोडियम एक ऐसी धातु है जो जल पर तैरती है।
• ग्रीन हाउस प्रभाव में प्रमुख उत्तरदायी गैस कार्बन डाइऑक्साइड है।।
• गंधक के अम्ल का प्रयोग मोटर कार की बैटरियों में किया जाता है।
बोरिक अम्ल तथा पोटेशियम परमैग्नेट प्रतिरोधी (antiseptic) पदार्थ है।
• आयोडीन एक प्रबल जीवाणनाशी है। आयोडीन का प्रयोग टिक्चर बनाने में
किया जाता है।
• एन्जाइम विशेष प्रकार के प्रोटीन होते हैं।
गमक्सिन (C6H6CI6) हैक्साक्लोरो साइक्लो हैक्सेन है। यह एक उत्तम । कीटनाशी है।
• अधिकांश संक्रमण धातु आयन एवं उनके यौगिक रंगीन होते हैं।
हीमोग्लोबिन एक विशेष प्रकार की प्रोटीन है जिसका प्रमुख कार्य फेफड़ों से
ऑक्सीजन को रक्त धारा की सहायता से विभिन्न ऊतकों को पहुँचाना है।
• कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) का प्रयोग पायरीन के नाम से आग बुझाने के
संयंत्रों में किया जाता है।
• नाइट्रोग्लिसरीन का प्रयोग डायनामाइट बनाने में किया जाता है।
एलम (Alum) का प्रयोग चमड़े की ट्रेनिंग में किया जाता है।
• क्यूप्रस ऑक्साइड (Cu2O) को रूबी कॉपर कहते हैं। इसका प्रयोग काच का।
रंगीन बनाने में किया जाता है।
• मैग्नीशियम सल्फेट (MgSo4.7H,O) को एप्सोम लवण कहते हैं। इसका
उपयोग दस्तावर (Purgative) के रूप में होता है।
• स्टैनिक सल्फाइड (Sns2,) को मोसाइक गोल्ड कहते हैं। इसका प्रयोग पेंट के
रूप में किया जाता है।
• मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)2,] को मिल्क ऑफ मैग्नीशियम कहा जाता
है। इसका प्रयोग पेट की दवाओं में किया जाता है।
• प्रोड्यूसर गैस में CO2,, N2, तथा H2, होती है। यह एक ईंधन गैस है।।
• पोटेशियम कार्बोनेट को पर्ल एश (Pearlash) कहते हैं। यह सोप बनाने में काम
आता है।
• अमोनियम क्लोराइड (NH4,CI) को नौसादर कहते हैं। यह औषधियों में काम
आता है।
• कैल्सियम फॉस्फेट [Ca3(PO4,)2] का प्रयोग टूथपेस्ट बनाने में किया जाता है।
• प्लास्टर ऑफ पेरिस [(CaSO2).H2,O] का प्रयोग हड्डी टूटने पर प्लास्टर
चढ़ाने के काम आता है।
सिक्का धातु में 75% कॉपर तथा 25% निकिल होता है। • नाइक्रोम (nichrome) क्रोमियम, निकिल तथा आइरन की मिश्र धातु है। यह
हीटरों के कॉइल (Coil) बनाने के काम आती है।
ग्रेफाइट का प्रयोग शुष्क स्नेहक (drylubricant) के रूप में किया जाता है।
• कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के लिये प्राणदायिनी गैस है।
• बादल तथा कोहरा कोलॉइडी विलयन हैं।
• जब कोई द्रव किसी ठोस में परिक्षेपित होकर कोलॉइडी विलयन बनाता है तो वह
जैल (gel) कहलाता है; जैसे-जैली, पनीर, मक्खन आदि।
• जब एक द्रव दूसरे अभिश्रणीय द्रव में परिक्षेपित होकर कोलॉइडी विलयन
बनाता है तो वह पायस (emulsion) कहलाता है; जैसे—दूध। धुआँ वायु में कार्बन और अन्य कणों का कोलॉइडी विलयन होता है।
फोटोग्राफिक प्लेट पर सिल्वर ब्रोमाइड तथा जिलैटिन की पतली परत चढ़ी होती
न सधिक मात्रा में पाया जाने वाला खनिज है। अधिकतर चट्टानें इसी से बनी हैं।
• कुछ पदार्थ सूर्य के प्रकाश में रखने के बाद प्रकाश से हटाये जाने पर भी प्रकाश निकालते रहते हैं। इस घटना को स्फुरण या स्फुरदीप्ति (Phosphorescence) कहते हैं। यह गुण कैल्सियम सल्फाइड में पाया जाता है। सबसे भारी धातु ओसमियम (Os) है।
डी० डी० टी० का पूरा नाम डाइक्लोरो डाइफिनाइल ट्राइक्लोरोईथेन है। यह एक
कीटाणु नाशक दवा है।
• धातुओं की विद्युत चालकता तापक्रम बढ़ाने पर घटती है और तापक्रम कम करने ।
पर बढ़ती है। अर्द्धचालकों की विद्युत चालकता तापमान बढ़ाने के साथ बढ़ती है और तापमान घटाने पर कम होती है। परम शून्य तापमान पर गैसों का आयतन शून्य हो जाता है अथवा अणुओं के सभी प्रकार की गति शून्य हो जाती है।
• VII A उप समूह के तत्त्वों (F, CI, Br, I, At) को हैलोजेन कहते हैं जिसका अर्थ
है लवण बनाने वाले।
• क्लोरीन एक रोगाणुनाशी है।
एस्प्रिन तथा पैरासिटामोल ज्वरनाशी पदार्थ हैं।
• नाइट्रस ऑक्साइड (N,2 0) एक सामान्य निश्चेतक है।
क्लोरोफॉर्म का प्रयोग भी निश्चेतक के रूप में किया जाता है। प्रतिजैविक (Antibiotics) बैक्टीरिया, कवक तथा मोल्डस द्वारा उत्पन्न होते हैं
जो अन्य बैक्टीरिया के लिये विषैले होते हैं। ।
चैनसिलिन एक उत्तम प्रतिजैविक है जो कवक से प्राप्त होता है।
कोल का व्यापारिक नाम क्लारामाइसिटिन है। इसका प्रयोग
डायरिया तथा पेचिस में किया जाता है। यह एक प्रभावी टाइफाइड, ज्वर, डाइरिया तथा पेचिस में किया जात प्रतिजैविक है। रेशम तथा ऊन जातव प्राकृतिक रेशे हैं। सूत, जूट तथा हैम्प वान प्राकृतिक रेशे हैं।
हीलियम गैस हल्की होने के कारण वायुयानों के टायरों में भरी जाती है। हीलियम और ऑक्सीजन का मिश्रण गहरे समुद्रों में गोताखोरों द्वारा वाय के स्थान पर प्रयोग किया जाता है, क्योंकि अधिक दाब पर हीलियम नाइट्रोजन । की अपेक्षा रक्त में कम विलेय होती है। दमा के रोगी को भी हीलियम और ऑक्सीजन का मिश्रण वायु के स्थान पर दिया।
जाता है।
• विज्ञापन चिन्हों में विभिन्न रंग के प्रकाश उत्पन्न करने के लिये नियॉन गैस का
प्रयोग किया जाता है।
• हवाई अड्डों पर विमान चालकों को संकेत देने के लिये नियॉन लैम्प का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह प्रकाश कुहरे में अधिक चमकता है।
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