Ayurvedic :कुछ रोगों के लिए विशेष उपचार

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कुछ रोगों के लिए विशेष उपचार

Special treatment for certain diseases in Ayurvedic

 

 जोड़ों में दर्द होने पर निम्न नुस्खों को अपनाइये।

दर्द में बहुत आराम मिलेगा -

(1) हिंगाष्टक चूर्ण बाजार में मिलता है। वांछित परिणाम प्राप्त
होने तक एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन लें। हिंगाष्टक चूर्ण को आप घर में
भी बना सकते है। यह पीपली, काली मिर्च, सौंठ, काला जीरा, सफेद
जीरा, सेंधा नमक और हींग को घी में भूनकर बनाया जाता है

(2)  पंचकोल नित्य प्रति आधा चम्मच खायें। पंचकोल में नाम से
ही स्पष्ट है कि पाँच पदार्थ डाले जाते हैं। इसे पीपली, पीपलामूल, चत्य,
क्षत्रक और सौंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाते हैं। यह बाजार में
बना-बनाया भी मिलता है।

(3)  पानी में अजवाइन डालकर कुकर में गर्म करें। कुकर का वेट
हटाकर वहाँ नली लगाकर दर्द वाले जोड़ों पर भाप लें।

 (4) गर्म पानी में निरगुंडी के पत्तों को डालकर प्रभावित जोड़ों पर
पत्तों से सिंकाई करें।

(5) एक चम्मच शक्कर में सौंठ और घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन
करें। कुछ ही दिनों में आराम मिलता है।

Special treatment for certain diseases in Ayurvedic
दाँतों की देखभाल ऐसे भी करें - दाँतों को स्वस्थ रखने के लिए
नीम की दातौन सबसे बढिया उपाय है। प्रतिदिन नीम की दातौन करने
वालों के दाँत हमेशा स्वस्थ, सुंदर और चमचमाते रहते हैं। हाँ, दातौन को
 करने के पूर्व आधे घण्टे पानी में भिगोकर अवश्य रखें। इन उपायों को
भी आजमायें -
 (1) त्रिफला (आँवला, हरड़ और बहेरा का मिश्रण) और काले
नमक के मिश्रण से दाँतों को रोज माँजिये।

 (2) अनार के छिलके, नीम की पत्तियाँ और काले नमक की लुग्दी
से दाँतों को माँजने से दंत-रोग समूल नष्ट हो जाते हैं।
(3)  काले  तिल को भी चबाने से दन्त रोग में आराम मिलता है
Special treatment for certain diseases in Ayurvedic

मधुमेह के लिए उपयोगी - 

 

शरीर में जब कार्बोहाइड्रेट एवम  वसा युक्त भोजन 

 रासायनिक किया के कारण ग्लूकोस में परिवर्तित होता है तब शरीर में उपस्थित पैंक्रियास  
 (अग्न्याशय) ग्रंथि से निकलने  वाला 
इंसुलिन नामक रसायन इस ग्लुकोज का पाचन करता है। ,पैंक्रियास  से
इंसुलिन का उत्सर्जन कम या बंद हो जाना ही मधुमेह है।
ग्लुकोज रक्त और मूत्र में घुलकर शरीर में हानिकारक प्रभाव डालता

है।

 मधमेह के रोगी यदि अपने खान पान के प्रति जागरूक रहे
योगासन व प्राणायाम को नियमित रूप से करे, तो वे सामान्य
अधिक आयु जी सकते हैं। निम्न नियमों का पालन कर इस रोग के
दुष्प्रभावों से बचें -
(1) सदा सुहागन के छह से दस फूलों का नियमित रूप से
प्रातःकाल खाली पेट सेवन कीजिये। चालीस दिनों में लाभ होता है।

(2 तनावों को भगाइये। तनाव इस रोग के दुष्प्रभावों को बढ़ाते हैं।

(3) सलाद-पत्ता को भोजन के पूर्व खायें। इसमें पर्याप्त मात्रा में
इंसुलिन के तत्व विद्यमान रहते हैं।

(4) बोगेन वेलिया के पाँच पत्ते एक सप्ताह तक खायें।

(5) जासौन के फूल की एक कली एक सप्ताह तक खायें।

(6) अमरूद के छह पत्ते एक सप्ताह तक खायें।


(7) सीताफल के पाँच-छह पत्ते सात दिनों तक प्रातःकाल खाये।
मधुमेह पर नियंत्रण होता है। इन उपायों को एक-एक करके अपनाये।

 (8) अपने भोजन को कई भाग में बाँटें। यदि आप दिन में दो
भोजन करते हैं, तो इतने भोजन को दिन में चार-पाँच बार में
थोड़ा करके लीजिये। भोजन में चॉवल, आल, कंद, घी, मक्ख
की मात्रा कम कर दें। करी पत्ता, अंकुरित चने एवं सलाम
आलू, कंद, घी, मक्खन, तेल
अन एवं सलाद के पत्ते का
भोजन में समावेश करें।

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