Ayurvedic:सौंदर्य वृद्धि के लिए उपचार Treatment for beauty enhancement

No Comments

 

 
सौंदर्य वृद्धि के लिए उपचार Treatment for beauty enhancement
aloveraa

 

 

 

सौंदर्य वृद्धि के लिए उपचार
Treatment for beauty enhancement

 

अनेक औषधीय पौधे ऐसे हैं, जिन्हें आप बिना अधिक परेशानी के 
आसानी से अपने घर-आँगन या बाग-बगीचे में लगा सकते हैं। जगह की
कमी हो, तो कुछ पौधों को जैसे एलोवीरा, तुलसी, ब्राह्मी, करी पत्ता,
सफेद मूसली आदि को आप गमलों में भी उगाकर उनका लाभ ले सकते
हैं। यहाँ हम सौन्दर्य प्रसाधन एवं सामान्य रोगों में उपयोगी कुछ हर्बल
उपाय बता रहे हैं।

सौंदर्य प्रसाधन के लिए एलोवीरा और ब्राह्मी

 

ऐलोवीरा, ब्राह्मी आदि ऐसे पौधे हैं, जिनका सौन्दर्य प्रसाधन में
बहुतायत से उपयोग हो रहा है। ऐलोवीरा को तो हर गृहिणी को अपने घर
में लगाना चाहिए। गवारपाठा का अंग्रेजी नाम ऐलोवीरा है। ऐलोवीरा को
मोषव्वर, घीकुँआर या घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है। हमारे
देश में इसकी 2-3 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसे एक बार लगाने पर यह
सैकड़ों सालों तक लगा रहता है। दरअसल हर बरसात में प्रत्येक पौधे से
चार नये शल्क निकलते हैं, जिनसे नये पौधे पनपते हैं। इनके पत्तों में
वातावरण से नमी एकत्र करके, उसे वाष्पित न होने देने की अद्भुत
क्षमता होती है, जिससे इन्हें सिंचाई की विशेष आवश्यकता नहीं होती है।
इसके पत्ते दन्तुर और मांसल होते हैं, जिनके अंदर रंगहीन या पीलापन
लिए जैलीय पदार्थ होता है। यही जैल अनेक सौंदर्य प्रसाधनों में प्रयुक्त
होता है। इस जैल को निकालने के लिए पत्तों को खड़ी कार में काटना
चाहिए। ब्राह्मी जमीन पर फैलने वाला पौधा है। इसके पत्ते गोल होते हैं।

 

 

बालों के सौंदर्य के लिए हर्बल उपाय

 

 

(1) एलोवीरा जैल को बालों में प्रातःकाल प्रतिदिन लगाने से बालों
के रोग से छुटकारा मिलता है और बाल काले, घने, मजबूत और लम्बे
होते हैं।
(2) करी पत्ता  या मीठी नीम की 8-10 पत्तियों का नियमित सेवन
से बालों को सफेद होना कम हो जाता है।

(3 )आँवला, गुरबेल और गुरुसु बराबर मात्रा में पीस लें। यह
वद्धि के लिए टानिक है। इसे आधा चम्मच नित्य प्रति खायें।

(4 )शिकाकाई, आंवला, रीठा, नागरमोथा और हिंगराज की
बराबर मात्रा के मिश्रण को पानी में भिगोकर बालों में लगाने से वे
मजबूत, घने और लम्बे होते हैं।

(5 ) आँवले के तेल में जटामांसी और शृंगराज का मिश्रण
मिलाकर लगाने से बाल काले और लम्बे होते हैं।


(6) ब्राह्मी के पत्तों को पीसकर बालों में लगायें। बाल घने और
लम्बे  होते हैं। इसके 8 पत्तों को प्रतिदिन खाने से भी बालों में अद्भुत
होता है। इसे खाने से याददाश्त भी तेज होती है।

(7) गाजर घास के कारण बालों में असमय सफेदी आने लगती है।
बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। आसपास की गाजर-घास के पौधों को
समूल नष्ट करा दें।

 चेहरे के सौंदर्य के लिए हर्बल उपाय

 

 

(1) एलोवीरा जैल को प्रातःकाल चेहरे पर मलें। इससे चेहरा
चिकना और कांतिमान हो जाता है। एक-दो बार लगाने से ही चेहरे की
त्वचा में निखार आने लगता है। एक चम्मच एलोवीरा जैल का सेव5 
करें। कील-मुंहासों को दूर करने के लिए यह बहुत कारगर उपाय है। इसे
खाने से हृदय की रक्त वाहिकाओं में जमाव कम होता है। अधिक
कोलेस्ट्रॉल वालों के लिए यह बहुत प्रभावशाली दवा है

(2) कुलिजन का पाउडर गुलाब जल के साथ मिलाकर फेस पैक
के रूप में प्रयोग करें। त्वचा एकदम मुलायम हो जायेगी।

| (3) एक चम्मच रतनजोत को तीन चम्मच नारियल के तेल में
लाकर आधे घण्टे तक गर्म करके ठण्डा कर लें। इसे ओंठों पर लगाने

से ओंठ फटेंगे नहीं और उनका रंग भी निखर आयेगा।


वजन कम करने के लिए हर्बल उपाय

 

 

 (1) एलोवीरा जैल एक चम्मच सुबह-शाम लेने से शरीर में जमा
अतिरिक्त चर्बी कम होती है। इसकी इतनी खुराक लीवर के लिए भी
लाभकारी है।

(2) पुनरनवा का पाउडर एक चम्मच खुराक प्रतिदिन खाने से
नवयौवन का संचार होता है। यह किडनी के लिए भी लाभदायक है।

(3) यदि आपके घर के समीप नीम, बेल और तुलसी लगी हो
तो वजन कम करने के लिए यह उपाय अपनाइये। नीम, बेल और
तुलसी के पाँच-पाँच ताजे पत्ते लेकर उसकी लुग्दी बना लें और इसे पानी
के साथ खाली पेट प्रातःकाल लें। ध्यान रखें तुलसी दो प्रकार की होती
है - राम तुलसी और श्याम तुलसी। श्याम तुलसी की डंठल काली होती
है। इसी श्याम तुलसी का औषधीय महत्व अधिक है। श्याम तुलसी के
पत्तों को पीसकर पानी के साथ खाने से साधारण ज्वर भी उतर जाता है।

(4) आँवला, हरड़ और बहेरा से त्रिफला बनता है। त्रिफला और
गुग्गुल की बराबर मात्रा लेकर उसकी गोलियाँ बना लें। दो-दो गोलियाँ
अपेक्षित परिणाम प्राप्त होने तक सुबह-शाम लें। त्रिफला का चूर्ण और
गुग्गुल की गोलियाँ बाजार में भी मिलती हैं।

(5) करी पत्ता की पचास पत्तियाँ लें। इन्हें दो-दो घण्टे के अंतराल
से खायें। मोटापे के साथ-साथ यह रक्तचाप, मधुमेह, पेट के रोग, अपच
और गैस के रोगों में लाभदायक है।

(6) निरगुंडी के पत्तों को पानी में डालकर भाप लें। त्वचा में वसा
के जमाव को कम होने में सहायता मिलती है।

 (7) सोंठ, काली मिर्च, हरड़ और पीपली को बराबर-बराबर मात्रा
में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा प्रतिदिन लेने से

back to top
<>