अशोक (सम्राट)

No Comments



                                                    अशोक (सम्राट)


        ASHOK

        अशोक (सम्राट)



आज हम महान  सम्राट अशोक के बारे में कुछ बाते  आपके साथ शेयर कर रही हूँ। 
सम्राट अशोक भारतीय इतिहास में एक अमिट अध्याय  है  जो एक  हिंसक शासक थे। परन्तु 
कुछ समय पश्चात् वे बौद्ध धर्म के महान  अनुयायी  बन गए जो उनके स्तम्भ  लेख भारतीय 
इतिहास में एक महत्वपूर्ण आधार हैं।

अशोक (2600-232 ई.पू.)

बिन्दुसार की मृत्यु के पश्चात अशोक सम्राट बना था | 
अनुश्रुतियों के अनुसार अशोक अपने 99 भाइयों का वध
करके 269 ई.पू. में सम्राट बना. सम्राट बनने से पूर्व| 
अशोक अवंति का प्रांतपति था, और उसने तक्षशिला में
हुए विद्रोह को दबाने में सफलता प्राप्त की.

कलिंग युद्ध- अशोक ने अपने राज्यारोहण के आठवें
शर्ष 261 ई.पू. में कलिंग (उड़ीसा) राज्य पर आक्रमण
किया, अत्यंत भीषण रक्तपात व नरसंहार के पश्चात
अशोक विजयी रहा युद्ध की विभीषिका से उसका हृदय
द्रवित हो उठा. उसने युद्ध का परित्याग कर, राज्यारोहण
के नौवें  वर्ष बौद्ध धर्म स्वीकार किया (280 ई.पू. ) एवं
उसके प्रचार प्रसार हेतु अथक प्रयास किए. उसने
दिग्विजय के स्थान पर 'धम्म् विजय' की नीति अपनायी.
धम्म पाली भाषा का शब्द है.

अशोक ने 'देवनामप्रिय' एवं 'पियदस्सी' की उपाधि
धारण की, अशोक की मृत्यु 232 ई.पू. में हुई.

अशोक ने सहिष्णुता,उदारता और करूणा के त्रिविध ।
आधार पर राजधर्म की स्थापना की,

अशोक के अभिलेख
अशोक  अभिलेख
अशोक अभिलेख

अशोक के अभिलेखों में 14 वृहत शिला
शिलालेख, 7 स्तम्भ लेख, गुफा अभिलेख,पृथक 
कलिंग अभिलेख एवं लघु स्तम्भ लेख शामिल हैं।

अशोक के प्रस्तर स्तंभ एकाशमक, शानदार पॉलिश 
तथा शुण्डाकार शेफ्ट वाले हैं. इसके पत्थर प्रायःचुनार 
से लाए जाते थे,

1837 ई. में जेम्स प्रिन्सेप ने सर्वप्रथम अशोक
अभिलेख को पढ़ने में सफलता प्राप्त की.
अशोक के अभिलेखों में जनता की भाषा ‘प्राकृत 'का 
प्रयोग किया गया है.

अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा एवं ब्राम्ही लिपि में हैं
मानसहरा तथा शहाजगढी अभिलेखों में खरोष्ठी
का प्रयोग हैं, जो दायीं से बायीं ओर लिखी जाती हैं

कंधार अभिलेख द्विभाषी है (ग्रीक एवं अरेमिक में)।

वृहत शिलालेखों में धम्म एवं प्रशासन का वर्णन है.

मास्की, गुजरा अभिलेखों में अशोक का नाम मिलता है।
जबकि अन्य अभिलेखों में उसका उल्लेख 'देवानामप्रिय ।
के नाम से है.

भब्रु अभिलेख में अशोक बौद्ध धर्म के त्रिरत्न में विश्वास
व्यक्त करता है. भबू स्तंभ लेख में अशोक ने स्वयं को
मगध का सम्राट बताया है.

रुम्मिनदई अभिलेख- करों की छूट एवं बुद्ध से संबंधित
स्थानों की यात्राएं.
अशोक ने अपने राज्य की सीमा पर बसने वाले चोलों,
पाण्डयों, केरलपुत्रों और सतियपुत्रों का उल्लेख है जिनमें
सतियपुत्रों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं है. 

अशोक के तेरहवें शिलालेख (धौली) में कलिंग युद्ध की ।
विजय का वर्णन किया गया है.

महान सम्राट अशोक के दूसरे और तेरहवें शिलालेख से ।
दक्षिण के राज्यों संगम राज्य' तथा श्रीलंका के बारे में
जानकारी प्राप्त होती है।

तेरहवें शिलालेख में विदेशी यूनानी राज्यों का उल्लेख है।
जिनसे अशोक के मैत्रीपूर्ण संबंध थे.

अशोक द्वारा निर्मित सारनाथ स्तम्भ से ही भारत सरकार
ने राष्ट्र चिन्ह ग्रहण किया है,


अभिलेख

नसहरा एवं शाहबाजगढी          - खरोष्टी लिपि में।

कंधार                        - द्विभाषी (ग्रीक, अरेमिक)

भास्की, गुज्जरा                        - अशोक का नाम

 

भब्रू  अभिलेख -                          त्रिरत्न में विश्वास

भबू स्तंभ लेख              - स्वयं को मगध का सम्राट

 

रूम्मिनदई अभिलेख       - करों की छूट एवं यात्राएं.

 

तेरहवें शिलालेख (धौली )     - कलिंग युद्ध का वर्णन

 

तेरहवें शिलालेख-            यूनानी राज्यों का उल्लेख

 

सारनाथ स्तम्भ-           भारत सरकार का राजचिन्ह

 

 

 

 

 

back to top
<>