तुलसी
तुलसी का प्रयोग आदिकाल से धार्मिक अनुष्ठान, औषधियों एवंसौंदर्य प्रसाधनों में होता आया है।
अब लोग तुलसी की खेती करके कम समय में अधिक धन कमा रहे हैं।
यहाँ हम आपको तुलसी के घरेलूऔषधीय प्रयोग की जानकारी दे रहे हैं।
तुलसी, तुलसी और रोगों का उपचार,tulsi
Tulsi - Ocimum sanctum
कर्णशूल -
सरसों के तेल में तुलसी पत्र औटावें पत्तियों के जल
जाने पर तेल को छान कर ठंडा करके कुछ बूंदे कान में टपकाने से
बधिरता में लाभ होता है।
नाक पीड़िका
नाक के भीतर फुसी हो, तो तुलसी-पत्र को बारीक
पीसकर चूँदें।।
नेत्र रोग -
तुलसी-बीज 2 ग्राम, रसौत 2 ग्राम, आमा हल्दी
2 ग्राम, अफीम 120मिलीग्राम। इन सबको पीसकर आँखों के चारों ओर
लेप करने से आँखों का दर्द व सुर्खियों में लाभ होता है।
व्रण -
यदि शरीर पर या चेहरे पर व्रण या फोड़े निकल आये हों,
तो शुष्क तुलसी-पत्रों के बारीक चूर्ण को पाउडर की तरह छिड़कने से व्रण
ठीक हो जाते हैं।
जलने से आये फफोले
- तुलसी की पत्तियों के रस में नारियल
तेल मिलाकर लगाने से फफोले मिट जाते हैं।
सिर-शूल
- तुलसी-पत्र को उसके स्वरस में कपूर घिसकर ललाट
पर लेप करने से सिर दर्द मिट जाता है।
दंत शूल -
तुलसी पत्र और काली मिर्च चूर्ण को मिलाकर दाँतों के
नीचे रखने से दाँत का दर्द मिट जाता है।
चर्म रोग
- तुलसी के पौधे के नीचे की मिट्टी शरीर पर मलने से
चर्म रोगों में लाभ होता है।
रतौंधी
- तुलसी पत्र का रस आँखों में डालने से लाभ होता है।
मूच्र्छा
तुलसी पत्र के रस में थोड़ा नमक मिलाकर नाक में टपकाने
से मूच्र्छा दूर हो जाती है।
बिच्छू का दंश
- तुलसी मूल को जल में पीसकर गोली बनाले
गोली को उस स्थान पर रखें, जहाँ बिच्छू ने काटा है, लाभ होगा|
सर्प विष
तुलसी की मंजरी या पत्तों को पीस कर सर्प काटने
के स्थान पर लगायें। इसके पहले चीरा लगाकर विष व दूषित रक्त
निकाल देना चाहिए। बेहोशी की दशा में तुलसी स्वरस को कान व
में डालना चाहिए|
श्वास रोग
तुलसी-पत्र और काला नमक मुख में रख धीरे-धीरे
रस चूसते रहने से लाभ होता है।
कुत्ते के काटने पर
तुलसी पत्तों का चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ
लें।
केश रोग
यदि बाल गिर रहे हों या असमय सफेद हो रहे हों, तो
तुलसी के पत्ते और आँवले को बारीक पीसकर सिर में मलने से बालों
का गिरना और असमय सफेद होना रुक जाता है।
मुख निखार
तुलसी पत्र के रस में अदरख (आर्द्रक) मिलाकर
लगाने से मुख के दाग-धब्बे मिट जाते हैं और निखार आ जाता है।
तुलसी पत्र को संतरे के रस में पीसकर रात्रि में सोते समय मुख पर
लेप लगायें, प्रातः गुनगुने जल से धोलें। इससे मुहासे मिट जायेंगे।
तुलसी रस में नीबू रस मिलाकर मुख पर लगायें, इससे मुख
दूषिकाएँ मिट जायेंगी।
ताँबे के बर्तन में नीबू का रस भरकर एक दिन रखें। फिर समान ।
भाग तुलसी का रस और काली कसौंदी का रस डालकर धूप में रखें, रस ।
गाढ़ा हो जाने पर चेहरे पर लगायें। चेहरे की झाइयाँ, काले दाग, काल
मुहासे नष्ट हो जाएँगे। निरंतर लगाने से सफेद दाग भी मिट सकते हैं।
Ayurvedic plant
Tulsi - Ocimum sanctum
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तुलसी का प्रयोग आदिकाल से धार्मिक अनुष्ठान, औषधियों एवंसौंदर्य प्रसाधनों में होता आया है।
अब लोग तुलसी की खेती करके कम समय में अधिक धन कमा रहे हैं।
यहाँ हम आपको तुलसी के घरेलूऔषधीय प्रयोग की जानकारी दे रहे हैं।
तुलसी, तुलसी और रोगों का उपचार,tulsi
Tulsi - Ocimum sanctum
कर्णशूल -
सरसों के तेल में तुलसी पत्र औटावें पत्तियों के जल
जाने पर तेल को छान कर ठंडा करके कुछ बूंदे कान में टपकाने से
बधिरता में लाभ होता है।
नाक पीड़िका
नाक के भीतर फुसी हो, तो तुलसी-पत्र को बारीक
पीसकर चूँदें।।
नेत्र रोग -
तुलसी-बीज 2 ग्राम, रसौत 2 ग्राम, आमा हल्दी
2 ग्राम, अफीम 120मिलीग्राम। इन सबको पीसकर आँखों के चारों ओर
लेप करने से आँखों का दर्द व सुर्खियों में लाभ होता है।
व्रण -
यदि शरीर पर या चेहरे पर व्रण या फोड़े निकल आये हों,
तो शुष्क तुलसी-पत्रों के बारीक चूर्ण को पाउडर की तरह छिड़कने से व्रण
ठीक हो जाते हैं।
जलने से आये फफोले
- तुलसी की पत्तियों के रस में नारियल
तेल मिलाकर लगाने से फफोले मिट जाते हैं।
सिर-शूल
- तुलसी-पत्र को उसके स्वरस में कपूर घिसकर ललाट
पर लेप करने से सिर दर्द मिट जाता है।
दंत शूल -
तुलसी पत्र और काली मिर्च चूर्ण को मिलाकर दाँतों के
नीचे रखने से दाँत का दर्द मिट जाता है।
चर्म रोग
- तुलसी के पौधे के नीचे की मिट्टी शरीर पर मलने से
चर्म रोगों में लाभ होता है।
रतौंधी
- तुलसी पत्र का रस आँखों में डालने से लाभ होता है।
मूच्र्छा
तुलसी पत्र के रस में थोड़ा नमक मिलाकर नाक में टपकाने
से मूच्र्छा दूर हो जाती है।
बिच्छू का दंश
- तुलसी मूल को जल में पीसकर गोली बनाले
गोली को उस स्थान पर रखें, जहाँ बिच्छू ने काटा है, लाभ होगा|
सर्प विष
तुलसी की मंजरी या पत्तों को पीस कर सर्प काटने
के स्थान पर लगायें। इसके पहले चीरा लगाकर विष व दूषित रक्त
निकाल देना चाहिए। बेहोशी की दशा में तुलसी स्वरस को कान व
में डालना चाहिए|
श्वास रोग
तुलसी-पत्र और काला नमक मुख में रख धीरे-धीरे
रस चूसते रहने से लाभ होता है।
कुत्ते के काटने पर
तुलसी पत्तों का चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ
लें।
केश रोग
यदि बाल गिर रहे हों या असमय सफेद हो रहे हों, तो
तुलसी के पत्ते और आँवले को बारीक पीसकर सिर में मलने से बालों
का गिरना और असमय सफेद होना रुक जाता है।
मुख निखार
तुलसी पत्र के रस में अदरख (आर्द्रक) मिलाकर
लगाने से मुख के दाग-धब्बे मिट जाते हैं और निखार आ जाता है।
तुलसी पत्र को संतरे के रस में पीसकर रात्रि में सोते समय मुख पर
लेप लगायें, प्रातः गुनगुने जल से धोलें। इससे मुहासे मिट जायेंगे।
तुलसी रस में नीबू रस मिलाकर मुख पर लगायें, इससे मुख
दूषिकाएँ मिट जायेंगी।
ताँबे के बर्तन में नीबू का रस भरकर एक दिन रखें। फिर समान ।
भाग तुलसी का रस और काली कसौंदी का रस डालकर धूप में रखें, रस ।
गाढ़ा हो जाने पर चेहरे पर लगायें। चेहरे की झाइयाँ, काले दाग, काल
मुहासे नष्ट हो जाएँगे। निरंतर लगाने से सफेद दाग भी मिट सकते हैं।
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