तेनालीराम और मुंडन

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तेनालीराम और मुंडन


तेनालीराम के  किस्से
तेनालीराम के किस्से


एक बार तेनालीराम के विरोधियों ने सोचा कि इस बार तेनालीराम के साथ ऐसी चाल चलें कि इनका मुंडन संस्कार करा दिया जाए ।

सबने मिलकर विचार-विमर्श किया कि राजा के कानों में यह खबर पहुंचा दी जाए कि तेनालीराम शतरंज अच्छी खेलते हैं, वह राजा का अच्छा मनोरंजन कर सकते हैं ।

इस प्रकार यह खबर राजा को दे दी गई । राजा ने तेनालीराम से शतरंज खेल के बारे में पूछा- “क्यों तेनालीराम तुम शतरंज खेलना भी जानते हो ?'' राजा की बात सुनकर तेनालीराम टाल गए, वे शतरंज खेलना जानते तो जरूर राजा से हाँ कर देते ।

लेकिन दरबारियों ने राजा को ऐसी पट्टी पढ़ा दी कि बेचारे तेनालीराम को राजा के सामने शतरंज खेलने बैठना पड़ा।

थोड़ी देर बाद खेल शुरू हुआ और वही हुआ जो होना था । तेनालीराम हार गए। यह देखकर उनके विरोधी बहुत खुश हुए । शर्त यह भी थी कि तेनालीराम हार गए तो उन्हें अपना मुंडन संस्कार कराना होगा ।

हार गए तो मुंडन संस्कार की तैयारियाँ शुरू हो गईं । नाई बुलवाया गया और जैसे ही नाई ने मुंडन के लिए अपना उस्तरा सँभाला, तेनालीराम बोल पड़े-‘‘महाराज ! मैं आपसे कुछ प्रार्थना करना चाहता हूँ।'' राजा ने सहमति दे दी । वे बोले
“महाराज, क्षमा करें, मैंने इन बालों के ऊपर पाँच हजार का कर्जा ले रखा है । मेरे बाल किसी और की अमानत हैं ।''
"ठीक है, हम तुम्हें पाँच हजार स्वर्ण मुद्राएँ देते हैं, ताकि तुम कर्जदार को दे सको ।''-राजा ने कहा ।।

नाई ने अपना उस्तरा फिर चमकाया । तेनालीराम फिर मन ही मन
कुछ बुदबुदाने लगे ।
 राजा ने पूछा तेनालीराम अब क्या परेशानी है? क्या मन में बुदबुदा रहे हो?
 महाराज हमारे यहाँ मुंडन संस्कार माता पिता के स्वर्ग सिधारने पर होता है और मेरे माता पिता पहले ही स्वर्ग सिधार चुके है। 
अब तो आप ही मेरे माता पिता है मुझे डर है कहीं मेरे मुंडन से आपके ऊपर अनिष्ट की छाया मंडराने न लगे। तेनालीराम ने डरते डरते बताया।
अपनी अनिष्ट की बात सुनकर सचमुच राजा घबरा गए। उन्होंने तुरंत ही अपना आदेश बदल दिया। 
"नहीं नहीं तेनालीराम का मुंडन संस्कार नहीं होगा ".. राजा का इतना कहना था की तेनालीराम तुरंत खड़े हो गए। नाई अपना उस्तरा चमकाता रह गया और विरोधी दरबारियों के चेहरे पर हवाईयाँ उड़ती नजर आने लगी। 
तेनालीराम पांच हजार अशर्फिया की थैली संभाले दरबार से विदा हुए । 
यह इनाम राजा ने उन्हें पहले ही उसकी वाक्पटुता से खुश होकर दिया था। यह देखकर विरोधी दरबारी जलभुन गए।

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