फूलदानों की देखभाल

No Comments


फूलदानों की देखभाल



तेनालीराम के  किस्से
तेनालीराम के किस्से




विजयनगर में कृष्णदेव राय नामक एक राजा थे । उनके दरबार में तेनालीराम नाम का एक दरबारी था । तेनालीराम बहुत हाजिर जवाब था। वह अपनी बातों से सभी का मनोरंजन किया करता था । उसकी बुद्धिमानी के अनेकों किस्से हैं । । 

एक बार राजा ने महल के ऊपर चार बड़े-बड़े फूलदान एक कारीगर से बड़े ही सुंदर तरीके से लगवा दिए। उन्होंने उनकी देख-रेख में चार नौकर भी लगा दिए ।

‘‘इन फूलदानों की हिफाजत करना ही तुम्हारा काम है।'' राजा की इस आज्ञा पर चारों नौकर राजकीय सेवा में जुट गए । | एक दिन हवा का तेज झौंका आया और चारों फूलदान में से एक फूलदान नीचे गिरा और टूट गया ।


फूलदान टूटते ही उस नौकर को राजा के सैनिक पकड़कर राजा के दरबार में ले गए।
‘‘महाराज, आपका लगाया फूलदान अचानक टूट गया है।''-सैनिक बोला ।
फूलदान के टूटने की खबर सुनकर राजा क्रोधित हो उठे । और बोले-‘‘फूलदान टूट गया है तो नौकर को मृत्युदंड दिया जाता है। अगले सप्ताह इसे फाँसी पर चढ़ा दिया जाए।''
राजा अपना हुक्म सुनाकर उठ गए।

धीरे-धीरे यह खबर तेनालीराम को मिली कि बेचारा एक बेकसूर फाँसी के फंदे पर झूलने वाला है। उन्होंने उसे बचाने का निश्चय किया और उसके कान में जाकर कुछ बुदबुदाने लगे ।
फाँसी से पहले उस नौकर से पूछा गया तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है ?
महाराज, मैं बाकी के तीन बचे हुए फूलदानों को देखना चाहता हैं।' नौकर ने जवाब दिया ।

महाराज ने आदेश दिया कि नौकर की अंतिम इच्छा पूरी की जाए। महाराज की आज्ञानुसार नौकर को महल में ले जाया गया ।
नौकर महल में पहुँचा तो उसने बाकी बचे तीन फूलदानों को भी एक-एक कर के जमीन पर पटक दिया । पटकते ही फूलदान चकनाचूर हो गए।
‘‘तुमने यह क्या किया ?''-सैनिक ने क्रोधित होकर कहा ।।
‘‘बाकी तीन और बेकसूरों को जीवन इससे बच जाएगा । इन फूलदानों की कीमत किसी की जान के जाने से ज्यादा कीमती है।' नौकर ने कहा ।।
राजा कृष्णदेव राय को जब इस घटना का पता चला तो उन्हें अपनी गलती का हुआ कि फूलदान टूटने से जीवन को नहीं तोड़ा जा सकता।


आपको यह लेख कैसा लगा कृपया शेयर व् कमेंट जरूर करे।



back to top
<>