11 सितंबर को खुलेगा लिंगंई माता का पट निसंतान दम्म्पतियों का लगेगा मेला

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11सितम्बर2019 को खुलेगा लिंगई मट्टा आलोर का द्वार

 अपने विशिष्ट रीति रिवाज और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध बस्तर की वादियों में एक ऐसा गुफा है जिसका द्वार वर्ष में सिर्फ एक बार,एक दिन के लिए खुलता है।रायपुर -जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसे विकास खंड मुख्यालय फरसगाॅव से दक्षिण -पश्चिम दिशा की ओर बड़ेडोगर मार्ग पर 8किलोमीटर की दूरी में ग्राम आलोर स्थित है,जहाँ बस्तर रियासत का प्राचीन कचहरी था ।इसी आलोर ग्राम के झांटीबंध पारा में स्थित पहाड़ी  (मट्टा )में एक गुफा है जिसका द्वार वर्ष में सिर्फ एक बार एक ही दिन के लिए खुलता है ।वह भी नयाखानी महापर्व के बाद  आने वाले प्रथम बुधवार को ।चूँकि इस बार अंचल में निवासरत आदिवासी समाज द्वारा 7सितंबर 2019को नयाखानी महापर्व मनाया जाना निश्चित हुआ है अतः प्रथम बुधवार 11 सितम्बर 2019पड़ेगा ।
lingai mata-लिंगंई माता
                        
    विदित हो कि ग्राम आलोर के उत्तर- पश्चिम दिशा में एक छोटी सी पहाड़ी है जिसके ऊपर एक विशाल चट्टान है उस चट्टान के ऊपर एक बड़ा  सा पत्थर है ।बाहर से बिलकुल सामान्य दिखने वाला यह पत्थर अंदर से स्तुपाकार है मानो जैसे किसी कटोरे को उलट दिया गया हो ।इस गुफा का एक ही प्रवेश द्वार है जो सुरंगनुमा है जहां बैठकर या लेटकर ही प्रवेश किया जा सकता है ।अंदर एक साथ 15 से 20 लोग ही बैठ सकते हैं ।
     गुफा के अंदर बीचोंबीच पत्थर का लिंग की आकृति है जिसकी ऊँचाई डेढ़ से दो फीट है ।इस आकृति को स्थानीय निवासी "लिंगई याया "(लिंगई माता )पुकारते हैं,जो धीरे धीरे बढ़ते जा रहा है।यहां संतान प्राप्ति की कामना लिए दंपति आते हैं ।यहाँ मनौती मांगने का तरीका भी अपने आप में निराला है ।संतान की कामना लेकर आये दंपयियों को यहां खीरा चढ़ाना अनिवार्य है, इसी खीरे को पुजारी द्वारा पुजा के पश्चात दंपति को वापस किया जाता है जिसे दंपति द्वारा स्वयं के नाखून से फाड़कर लिंग के समक्ष ही गुफा के अंदर कड़ुआ भाग सहित ग्रहण करना होता है ।मनोकामना पूर्ण होंने पर अगले वर्ष गुफा खुलने पर पुनः दर्शन लाभ लेकर चढावा चढ़ाया जाता है ।इस प्रकृति शक्ति से अब तक लाखों दंपति लाभान्वित हो चूके हैं जिनका पंजीयन समिति की ओर से किया जाता है ।जतरा स्थल में आने वाले दंपतियों एवं श्रद्धालुओं के लिए आयोजन समिति एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा नि:शुल्क स्वल्पाहार की ब्यवस्था की जाती है ।
    उक्त जतरा में छत्तीसगढ़ के साथ साथ निकटवर्ती उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना,झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों के निःसंतान दंपति आधी रात से दर्शन लाभ हेतु कतारबद्ध हो जाते हैं ।


            महेश कुमार नाग

                 सचिव

      सर्व आदिवासी समाज

     विकास खंड फरसगाॅव

          09406073852

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