वोल्गा से गंगा इतिहास के रहस्यमई पन्ने

No Comments

     वोल्गा से गंगा 

 इतिहास के रहस्यमई  पन्ने

आज हम वोल्गा से गंगा राहुल सांस्कृत्यायन की प्रशिद्ध रचना के बारे में बात करेंगे। यह  मातृसत्तात्मक समाज की बेजोड़ रचना है , व भारतीय इतिहास जो रूस के वोल्गा तट का 6000 ई.पू. काल का वर्णन है ,
दूसरे खंड में  3500 ई.पू. के वोल्गा तट(मध्य ) का वर्णन है ,
तीसरे खंड में  मध्य एशिया ,पामीर उत्तर कुरु  काल लगभग 2000 ई.पू. हिंदी ईरानी सभ्यता का वर्णन किया गया है। 
चौथे भाग में पुरहूत (2500 ई.पू.) पहले इंद्र(सेनापति ), जनपति (गणपति )के बारे में बताया गया है। यह ताजिकस्तान (वक्षु ,उपत्यका ) हिंदी ईरानी जनजीवन पर आधारित है , आज से 180 पीढ़ी पहले  आर्य जनो की कहानी है  इन्ही के कुछ संतान  भारत  की ओर  प्रस्थान  करने वाली हैं  ताम्बे का प्रयोग कृषि कार्य  आर्य  दासता को स्वीकृति इत्यादि का वर्णन मिलता है।

पांचवे खंड  पुरुधान (2000 ई.पू.)  स्थान -स्वात (ऊपरी) हिंदी (आर्य )में -आर्य ,असुर ,दास  व उनके  नगर के दुर्ग ,अश्व  ,ताम्र के  हथियारों का अधिकता से प्रयोग ,खान पान ( भक्षण ), इंद्र का पद समाप्त करना,आर्य (देव) असुर संघर्ष ,आर्यो  में दासता अस्वीकृत ,ताम्बे व पीतल  के हथियार ,व्यापार इत्यादि का वर्णन मिलता है। 
छटवां  खंड अंगिरा  -स्थान गांधार (तक्षशिला ) जाति -हिंदी आर्य ,काल 1800 ई.पू.-असुर दरबार की विलासिता ,दास ,मनोरंजन ,आर्यो  की सफलता , इत्यादि का वर्णन किया गया है। 
सातवां खंड सुदास , स्थान -कुरु पांचाल ,जाति वैदिक आर्य ,काल- 1500  ई.पू., यह आज से 144 पीढ़ी की आर्य जन की कहानी है। इसी समय पुरातन ऋषि  वशिस्ट , विस्वामित्र ,भारद्वाज  ऋग्वेद  के मंत्रो की रचना कर रहे थे ,इसी समय  आर्य पुरोहितो की सहायता से कुरु -पांचाल के आर्य सामंतो ने  जनता के अधिकार पर अंतिम व  सबसे जबरदस्त प्रहार किया  इसका  वर्णन इसमें मिलता है। 
      वोल्गा से गंगा -Volga to Ganga
Add caption

आंठवा खंड प्रवाहण , स्थान -पंजाब (युक्त प्रान्त) ,काल -700 ई.पू.  इस काल में उपनिषद के ब्रम्हा ज्ञान की रचना प्रारम्भ हुई थी।  इस समय उद्यान व असली लोहा  का प्रचलन बढ़ गया था। 
नवम खंड बंधुल मल्ल ,स्थान-उत्तर भारत , सामाजिक विषमता ,धनी व्यापारी का समाज में महत्वपूर्ण स्थान , लोक -परलोक  के प्रदर्शक ,दासता ,कुसीनारा ,श्रावस्ती ,साकेत (अयोध्या ) राजा प्रसेन जीत , शाक्य , बौद्ध उपदेश ,जन परिषद् ,व्यापर ,कोसल ,इत्यादि का वर्णन मिलता है। 
दसवां खंड नागदत्त ,काल -335 ई.पू. स्थान -पाटलिपुत्र 
इसमें  विष्णुगुप्त ,यवनो ,व मौर्य कालीन जनजीवन पर  आधारित  है। 
 ग्यारहवां खंड  प्रभा ,स्थान - वाराणाशी, साकेत  इसमें पुष्पमित्र शुंग ,शुंग वंश , पतंजलि ,

ईसा के बाद वाले                                               
12 सुपर्ण यौधेय (420 ई.)
13 दुर्मुख (630  ई.)
14 चक्रपाणि (1200 ई.)
15 बाबा नूरदीन (1300 ई.)
16 सुरैय्या (1600 ई.)
17 रेखा भगत (1800 ई.)
19 सफदर (1857  ई.)
20 सुमेर (1942  ई. 
यह रचना 23 /06 /1942 को प्रकाशित हुई थी। राहुल सांकृत्यायन जिन्हें महापंडित की उपाधि दी जाती है हिन्दी के एक प्रमुख साहित्यकार थे। वे एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद् थे और बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में उन्होंने यात्रा वृतांत/यात्रा साहित्य तथा विश्व-दर्शन के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान किए
 
किताब पूरी तरह पढ़ने  के  नीचे लिखे लिंक पर

वोल्गा से गंगा पीडीएफ  डाउनलोड करें  Cleak here

अन्य खबरे पढ़ने के लिए लॉगिन करे

 Gyanweb.in



back to top
<>